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Oura Member Care/मेंबर देखभाल

रेस्पिरेटरी रेट

इस बारे में और जानें कि Oura आपकी रेस्पिरेटरी रेट को कैसे मापता है, इसमें होने वाले बदलावों का क्या मतलब है, और हमारा तरीका कितना सटीक है.

Oura रेस्पिरेटरी रेट को कैसे नापता है
अपनी रेस्पिरेटरी रेट को समझें
Oura का रेस्पिरेटरी रेट डेटा कितना सही है


Oura रेस्पिरेटरी रेट को कैसे नापता है

Oura ऐप में दिखने वाली रेस्पिरेटरी रेट यह बताती है कि पिछली रात आपने एवरेज एक मिनट में कितनी सांसें लीं. यह वैल्यू आपको रेडीनेस टैब और ट्रेंड्स दोनों जगह मिल जाएगी.

रेस्पिरेटरी रेट

Oura आपकी रात के दौरान हार्ट रेट में मिनट-दर-मिनट होने वाले बदलावों से आराम के वक़्त रेस्पिरेटरी रेट का अनदाज़ा लगाता है. यह कैलकुलेशन इसलिए मुमकिन है क्योंकि आपका दिल और फेफड़े रेस्पिरेटरी साइंस एरिथमिया नाम के प्रोसेस से बहुत करीब से जुड़े होते हैं. इस नाते से ये बातें सामने आती हैं:

  • जब आप साँस अंदर लेते हैं, तो आपकी हार्ट रेट बढ़ जाती है.

  • जब आप साँस बाहर छोड़ते हैं, तो आपकी हार्ट रेट कम हो जाती है.

चूंकि Oura आपकी रिंग में लगे PPG सेंसर्स की मदद से हर धड़कन के साथ बनने वाली पल्स वेवफ़ॉर्म को एकदम सटीक तरीके से माप सकता है, इसलिए यह लगातार होने वाली दो धड़कनों के बीच के समय को भी मिलीसेकेंड्स में सही-सही नाप लेता है. इसे इंटरबीट इंटरवल (IBI) कहते हैं. अगर आप हार्ट रेट वेरिएबिलिटी (HRV) से वाक़िफ़ हैं, तो IBI दरअसल HRV की बुनियाद है.

रात भर की IBI वैल्यूज़ को एक साथ देखने पर, धीरे-धीरे एक 'ऊपर-नीचे' वाला पैटर्न साफ़ दिखने लगता है.

तीन ग्राफ़ का इमेज, जो दिखाता है कि IBI से रेस्पिरेटरी रेट कैसे निकाला जाता है

पहले बताए गए रेस्पिरेटरी साइंस एरिथमिया के उलट — जब आप IBI वैल्यूज़ कम होते देखें, तो इसका मतलब है आप सांस ले रहे हैं. और जब IBI वैल्यूज़ बढ़ती दिखें, तो इसका मतलब है आप सांस छोड़ रहे हैं. IBI वैल्यूज़ के विज़ुअल मैप में हर बढ़त और कमी मिलकर एक सांस बनाती है — ये "स्पाइक्स" के रूप में दिखती हैं, जो पहाड़ जैसी चोटियों की तरह नज़र आती हैं. चूँकि मैप में हर "स्पाइक" एक सांस को दिखाती है, इसलिए रात भर हर मिनट इस पैटर्न की गिनती करके आपकी एवरेज रेस्पिरेटरी रेट पता की जा सकती है.


अपनी रेस्पिरेटरी रेट को समझें

स्वस्थ बड़ों के लिए एवरेज रेस्पिरेटरी रेट 12–20 सांस प्रति मिनट होती है. यह नंबर हर इंसान के लिए अलग होता है. रात-दर-रात आपकी एवरेज रेस्पिरेटरी रेट में बदलाव आमतौर पर बहुत कम होते हैं — 1–2 सांस प्रति मिनट के अंदर. ऐसा इसलिए है क्योंकि आराम के वक़्त आपकी बॉडी को जितनी ऑक्सीजन चाहिए वो लगभग एक जैसी रहती है, जिससे रेस्पिरेटरी रेट एक बहुत स्टेबल मेट्रिक बन जाती है. एवरेज से दो सांस प्रति मिनट से ज़्यादा का फ़र्क़ ज़रूरी नहीं कि कोई चिंता की बात हो. लेकिन अगर किसी की रेस्पिरेटरी रेट नॉर्मल नंबर से काफ़ी अलग हो — ख़ासकर अगर यह कई रातों तक ऐसी रहे — तो यह बॉडी पर किसी दबाव का संकेत हो सकता है.

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि रेस्पिरेटरी रेट आपके लिए पर्सनल है — यानी आपको सिर्फ़ अपनी बेसलाइन के मुक़ाबले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए, न कि दूसरों के डेटा से तुलना करनी चाहिए. Oura में अपनी एवरेज रेस्पिरेटरी रेट और अपने नॉर्मल उतार-चढ़ाव को जानने से आपको यह पहचानने में मदद मिलेगी कि कब कोई बदलाव आपकी नॉर्मल रेंज से बाहर है.

अगर आपकी रेस्पिरेशन रेट बेसलाइन से ज़्यादा बढ़ी हुई आती है, तो यह एक संकेत हो सकता है कि आपकी बॉडी पर किसी तरह का दबाव पड़ रहा है.

रेस्पिरेटरी रेट बढ़ने की ये कुछ संभावित वजहें हो सकती हैं, जिन पर आप गौर कर सकते हैं:

बीमारी से लड़ना: बीमार पड़ते वक़्त रेस्टिंग हार्ट रेट बढ़ने और हार्ट रेट वेरिएबिलिटी कम होने पर रेस्पिरेटरी रेट भी बढ़ सकती है. अगर आप रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफ़ेक्शन (जैसे ब्रॉन्काइटिस) से जूझ रहे हैं, तो रेस्पिरेटरी रेट का बढ़ना फेफड़ों के अंदर हुए शॉर्ट-टर्म नुक़सान से जुड़ा होता है. इस तरह के इंफ़ेक्शन अक्सर उन सेल्स पर असर करते हैं जहाँ हवा और फेफड़ों के बीच गैस एक्सचेंज होता है, जिससे ऑक्सीजन और CO2 एक्सचेंज प्रोसेस अपने आप कम असरदार हो जाएगा. इस कमी की भरपाई के लिए रेस्पिरेटरी रेट बढ़ जाती है.

एयर क्वालिटी या ऊँचाई: कम एयर क्वालिटी में आपकी बॉडी को उतनी ही ऑक्सीजन देने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जितनी उसे ठीक से काम करने के लिए चाहिए होती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर सांस में उतनी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जितनी साफ़ हवा में मिलती है. इसलिए आपकी बॉडी को सिस्टम चलाए रखने के लिए एक मिनट में ज़्यादा सांसें लेनी पड़ती हैं. इसी तरह, ज़्यादा ऊँचाई पर हवा में ऑक्सीजन कम होती है. इसलिए जैसे-जैसे आप ऊपर जाते हैं, आपकी रेस्पिरेटरी रेट अपने-आप बढ़ने लगती है, क्योंकि हर सांस में आपकी बॉडी को कम ऑक्सीजन मिल रही होती है.

लंबे वक़्त से सांस लेने की दिक़्क़त: तेज़ खर्राटे, खाँसी, और ज़्यादा चलना फिरना इंटरबीट इंटरवल के उस स्टेडी उतार-चढ़ाव में रुकावट डाल सकते हैं जिससे रेस्पिरेटरी रेट का अनदाज़ा लगाया जाता है. इससे आपके डेटा में कभी-कभी फ़र्क़ आ सकता है — ख़ासकर अगर ऊपर बताई गई कोई भी बात आप पर अक्सर लागू होती हो.

ज़ोरदार एक्सरसाइज़: बहुत ज़्यादा इंटेंस एक्सरसाइज़, ख़ासकर जो मसल्स की सहनशक्ति या एनारोबिक फ़िटनेस (जैसे HIIT ट्रेनिंग) पर फ़ोकस करती है, उससे वर्कआउट ख़त्म होने के बाद भी लगभग 20–40 मिनट तक आपकी रेस्पिरेटरी रेट बढ़ी रह सकती है. इसे ध्यान में रखना अच्छा रहता है, ख़ासकर अगर आप सोने से पहले दिन के बाद वाले हिस्से में कोई मुश्किल वर्कआउट करने का सोच रहे हैं.

एंग्ज़ायटी: तेज़ और अनियमित साँस लेने के तरीक़े बढ़ी हुई एंग्ज़ायटी से जुड़े होते हैं.

हॉर्मोनल बदलाव: महिलाओं की रेस्पिरेटरी रेट में आमतौर पर ज़्यादा उतार-चढ़ाव होते हैं, क्योंकि रेस्पिरेटरी रेट में बदलाव मेंस्ट्रुअल साइकल के फ़ेज़ेज़ से जुड़े होते हैं. साइकल की शुरुआत (फ़ॉलिक्युलर फ़ेज़) में रेस्पिरेशन धीमी होती है और आख़िर में (ल्यूटियल फ़ेज़) तेज़ हो जाती है.

सोते समय कमरे का टेम्परेचर अगर आप ऐसे कमरे में सो रहे हैं जहाँ रात में आपको बहुत ज़्यादा गर्मी या ठंड लगती है, तो आपकी रेस्पिरेटरी रेट में बदलाव आ सकता है क्योंकि आपकी बॉडी उस बहुत ज़्यादा टेम्परेचर को झेलने के लिए ज़्यादा मेहनत करने लगती है. दोनों ही हालातों में आपको अपनी रेस्पिरेटरी रेट में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है,


Oura का रेस्पिरेटरी रेट डेटा कितना सही है

हमारी डेटा साइंस टीम के तरफ़ से किए गए एक एनालिसिस में Oura की फ़ोटोप्लेथिस्मोग्राफ़ी (PPG) से मिली रेस्पिरेटरी रेट मेट्रिक की तुलना इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG) से मिली रेस्पिरेटरी रेट से की गई. इसमें Oura Ring पूरी रात 1 सांस प्रति मिनट की रेंज में सटीक पाई गई.

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम एक मेडिकल सेटिंग में किया जाने वाला टेस्ट है जो आपके दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को मापता है. चूँकि बिना इनवेसिव टूल्स के रेस्पिरेशन मापना मुश्किल है, इसलिए ECG से मिली रेस्पिरेटरी रेट एक जानी-मानी प्रैक्टिस है जिसे मेडिकल-ग्रेड रिसर्च सेटिंग्स में बेहद भरोसेमंद माना जाता है.

यह स्टडी के नतीजे हाई (>20) से लेकर लो (<14) तक — रेस्पिरेटरी रेट की पूरी रेंज में सही पाए गए. यह 43 स्वस्थ, युवाओं पर की गई स्टडी में देखा गया — जिससे Oura Ring को रात की एवरेज रेस्पिरेटरी रेट मापने के एक वैलिड टूल के तौर पर ECG मेथड के बराबर माना गया.

Duke-NUS मेडिकल स्कूल और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के साथ मिलकर की गई इस स्टडी के बारे में आप यहाँ और ज़्यादा जान सकते हैं.

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